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आचार्य का दावा- विधायक रमीला के पुत्र ने मार्च में उन्हीं के आश्रम में रचाया था ब्याह

12 Jul 2019 07:53 am

मध्यप्रदेश के थांदला क्षेत्र में स्थित महर्षि दयानंद आश्रम के आचार्य ने दावा किया है कि कुशलगढ़ विधायक रमीला खड़िया के बेटे रोहित और बहू प्रियंका की शादी उन्हीं के आश्रम में ही करवाई गई थी। खुद को दया सागर बताने वाले आचार्य ने बताया कि मार्च के महीने में उनकी शादी कराई गई थी। आचार्य के इस दावे ने विधायक के बेटे की शादी नहीं कराने के झूठ को एक बार फिर सामने ला दिया है। आचार्य ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने शादी के बाद रोहित और प्रियंका को शादी का प्रमाण पत्र भी दिया है। हालांकि, आश्रम से शादी से जुड़े दस्तावेज देने से इनकार कर दिया गया।  

आचार्य के इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह सामने आ रहा है कि आखिर रोहित शादी के वक्त तय उम्र का नहीं था तो शादी के लिए आखिर क्या दस्तावेज दिए गए? या फिर विधायक ने अपने प्रभाव से आश्रम में बिना किसी दस्तावेज पेश किए शादी करवा दी? क्या आश्रम ने यह जानते हुए भी कि, रोहित शादी योग्य उम्र का नहीं था फिर भी शादी करवा दी? यह तमाम सवालों के जवाब अब जांच में छिपे हैं लेकिन प्रशासन फिलहाल खामोश है। कोर्ट की अवहेलना प्रतीत होने के बावजूद प्रशासन ने कोई जांच तक शुरू नहीं की है। प्रशासन की यह खामोशी सीधे तौर पर राजनीतिक दबाव को भी दर्शा रही है।  

2 बड़े सवाल  
आखिर कैसे बना मतदाता पहचान पत्र?  
विधायक खड़िया अगर दावा कर रही है कि कोर्ट के आदेश के बाद उनके बेटे रोहित की शादी नहीं कराई तो आखिर रोहित की पत्नी प्रियंका नाम का पोटलिया ग्राम पंचायत में मतदाता पहचान कैसे बना? शादी के बाद ससुराल में पहचान जोड़ने के लिए शादी के प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। जब इस मामले में बीएलओ वेलजी से बात की तो बताया कि उन्हें तो फार्म भरकर दे दिया था। उम्र के लिए दसवीं की मार्कशीट को आधार मानकर मतदाता पहचान पत्र बनाया। ऐसे में संदेह बढ़ गया है कि प्रियंका के दस्तावेज बनाने में भी बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया है।  
कार्रवाई के लिए एडीएम का पत्र ही गायब?  
पूरे मामले में एक और हैरान करने वाला तथ्य सामने आया है। बाल विवाह की शिकायत पर 28 फरवरी को तत्कालीन एडीएम ने आईसीडीएस उपनिदेशक, तहसीलदार गांगड़तलाई/कुशलगढ़ और थानाधिकारी कुशलगढ़ और सल्लोपाट लेटर जारी कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पत्र संख्या 871-75 से यह आदेश जारी किए गए थे लेकिन कलेक्ट्री से निकलने के बाद यह पत्र आईसीडीएस कार्यालय में पहुंचा ही नहीं। जो लचर प्रशसानिक व्यवस्था बताते हैं 

 

BY Bhaskar

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