Nathji Ki Tekri

Mohan Colony,

यह आश्रम श्री नाथ आश्रम ट्रस्ट में है. और इस ट्रस्ट को श्री रामानंद जी ने बनाया है. लगभग 1935 में रामानंद जी यहाँ पर आये. उनकी दीक्षा मेरठ से हुई. राजा .पृथ्वी सिंह जी के समय यहाँ स्कूल कॉलेज नहीं थे. तब स्वामी जी बच्चो को हिंदी संस्कृत मेथेमेटिक्स फिजिक्स दर्शन शास्त्र भाषाओँ में अरबी भाषा, इंग्लिश व् फारसी सिखाते थे व इनको आठ भाषाओँ का ज्ञान था. इन गुणों के कारण इन्हें विद्वान माना जाता था. स्वामीजी बच्चों को निस्वार्थ शिक्षा देते थे. स्वामी जी का देवलोक गमन 19 नवम्बर, 2001 को हुवा. इनकी समाधी इसी परिसर में है.

रामानंद जी ने यहाँ गीता का पाठ शुरू किया. यहाँ के सदस्य हर रविवार को गीताजी और रामायण का पाठ करने आते है. समय प्रात: 10:30 बजे. पूजा पाठ व आरती के पश्च्यात इस समारोह का समापन किया जाता है.

यहाँ के सदस्यों का कहना है की 6 दिन के दैनिक कार्यों की उर्जा यहाँ एक दिन पाठ करने से आती है. जो उर्जा मान बनाये रखती है.

यहाँ वेद शाला श्रावण मास में चलाई जाती है. इसमें वेदों का ज्ञान दिया जाता है. (कर्म कांड सिखाया जाता है.) 

कार्यक्रम 
* गीता जयंती (मोक्ष प्रदा एकादशी) 
* गुरु पूर्णिमा 
* पुण्य तिथि. (19 नवम्बर, 2001) 

जानकारी : श्री नाथ आश्रम ट्रस्ट

Nathji Ki Tekri
Mohan Colony, Banswara, Rajasthan
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