फर्जी दस्तावेजों से 22 सफाईकर्मियाें की भर्ती, बाल श्रमिक काे भी नाैकरी, नियुक्ति 14 जुलाई काे, अनुभव 31 जुलाई तक माना
प्रियंक भट्ट/चिराग द्विवेदी | बांसवाड़ा
नगरपरिषद सफाई कर्मियों की पिछले साल हुई भर्ती प्रक्रिया में जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। 219 पदों के लिए हुई भर्ती में आयुक्त और बाबूओं की मेहर से कइयों ने फर्जी दस्तावेज पेशकर नियुक्तियां ले ली है। चहेतों को नौकरी दिलाने में चली इस बंदरबाट में एक दो नहीं बल्कि 20 से ज्यादा कर्मचारी ऐसे है जिनके दस्तावेजों में भारी खामियां हैं।
भास्कर ने जब इस भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों के पेश दस्तावेज टटोले तो चौंकाने वाले घपले सामने आए। कोई आवेदन करने तक नाबालिग था तो किसी ने नियुक्ति के दिन से भी 17 दिन बाद का अनुभव प्रमाण पत्र पेश किया है। किसी ने स्कूल में काम करने का फर्जी प्रमाण पत्र पेश किया। जाली दस्तावेजों के बावजूद आंख मूंदकर नियुक्ति देने में पर साफ है कि बड़े स्तर पर लेन-देन का खेल चला है।
दरअसल, नगरपरिषद ने बीते साल 219 सफाई कर्मियों के पदों पर भर्ती कराई। फर्जी दस्तावेज और हेर-फेर की शिकायतों के चलते एसडीएम स्तर पर जांच करवाई गई। जिसके बाद 136 पदों पर नियुक्तियां दी गई। लेकिन, इनमें भी 22 ऐसे कर्मचारी थे जिनके पेश प्रमाण पत्रों के फर्जी होने और भारी खामियां होने की शिकायतें सामने आई। जिस पर 23 जनवरी को आयुक्त ने औपचारिकता के लिए नोटिस जारी कर दिए और 7 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा। लेकिन, जानकर हैरानी होगी कि इन नोटिसों के जवाब आज दिन तक परिषद को नहीं दिए गए। न ही परिषद की ओर से इनके खिलाफ कोई दूसरा नोटिस जारी किया और न ही कोई कार्रवाई। ये सभी कर्मचारी अभी वेतन उठा रहे है। सफाईकर्मी भर्ती के दौरान भर्ती में अनियमितता को लेकर लगातार प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद प्रशासन ने जांच कराई, जिसमें फर्जीवाड़ा सामने भी आया, लेकिन पूरे मामले को दबा दिया गया।
भास्कर के पास सबूत-ये हैं वो दस्तावेज जो बता रहे हैं कि भर्ती में कैसे दस्तावेजों को नजर अंदाज किया
केस 1- नियुक्ति 14 जुलाई की, अनुभव 31 जुलाई का
इस भर्ती प्रक्रिया में एक प्रकरण ऐसा सामने आया है जिसमें कर्मचारी ने भूतकाल का नहीं बल्कि भविष्य का अनुभव प्रमाण पत्र देकर नौकरी पा ली। नबीपुरा निवासी गोविंद पुत्र शंकरलाल कटारा ने सफाई कर्मी की भर्ती में 31 जुलाई 2018 का तक भूतपूर्व सैनिक कल्याण समिति में काम करने का प्रमाण पत्र सौंपा है। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब नगर परिषद ने कर्मचारी को ज्वाइनिंग ऑर्डर दिया वो 14 जुलाई का था। इसके अलावा कर्मचारी ने अावेदन मई 2018 में किया था। वर्तमान में गोविंद शहर के हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में कार्य करता है।
उपसरपंच अपनी ही पंचायत में सफाई का अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर सफाईकर्मी बना
सफाईकर्मचारियों की भर्ती में एक मामला ऐसा सामने आया, जिसमें एक उपसरपंच ने सफाई कर्मचारी की नौकरी प्राप्त कर ली। सुंदनपुर उपसरपंच मलकेश जोशी ने अपने अनुभव प्रमाण पत्रों में बतौर उपसरपंच ग्राम पंचायत में किए स्वच्छ भारत मिशन के कार्य और सुंदनपुर और ओडीएफ करने में सहायता करने का प्रमाण पत्र जमा कराया। भर्ती में प्रमाण पत्र किसी ने देखा तक नहीं। सफाई कर्मचारी की भर्ती के बाद मलकेश ने उपसरपंच का पद त्याग दिया। इस प्रमाण पत्र की सरपंच नारायणलाल ने भी पुष्टि की है।
केस-2- महिला ने स्कूल में काम का बनाया फर्जी प्रमाण
महिला सफाईकर्मी शबाना शेख ने भी नियुक्ति के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनाया। राजकीय उच्च माध्यिमक विद्यालय पृथ्वीगंज में काम नहीं किया, वहां की फर्जी उपस्थिति दर्शा दी। शबाना ने जुलाई 2011 से मई 2013 तक करना बताया साथ ही उपस्थिति पंजिका भी जोड़ी। उपस्थिति पंजीका में जिस शिक्षिका का नाम लिखकर हस्ताक्षर किए उनसे संपर्क किया तो बताया कि शबाना नाम की कोई महिला स्कूल में काम नहीं करती थी और जो हस्ताक्षर रजिस्टर में किए हैं वो मेरे नहीं हैं।
केस 3- नगर परिषद ने ही करवा दिया नाबालिग से काम
चहेतों को नौकरी देने में खुद नगर परिषद भी बड़ी गलती कर बैठा। नौकरी के लिए जरुरी अनुभव प्रमाण पत्र में अपने ही कार्यालय का प्रमाण पत्र बनाया। जिसमें कर्मचारी भूवन पुत्र मणिलाल मईड़ा को दैनिक वेतन भोगी के रूप में बेलदार के पद पर नगर परिषद में 2012 से 2015 तक काम करना बताया। भास्कर ने भुवन के जन्म प्रमाण पत्र का मिलान किया तो उसका जन्म 5 जून 1998 को होना सामने आया। जिसके अनुसार 2012 से भुवन महज 14 साल का था। सवाल यह उठता है कि आखिर सरकारी कार्यालय में कोई बाल श्रम पर कैसे कार्य कर सकता है।
केस 4- काॅलेज के प्राचार्य ने बना दिया नाबालिग का प्रमाण पत्र
घाटोल के नेगरेड रोड पर स्थित आदर्श महाविद्यालय के प्राचार्य ने बादल नाम के सफाई कर्मी का अपनी कॉलेज से अनुभव प्रमाण पत्र बना दिया है। गौर करने जैसा यह है कि जिस साल का अनुभव बनाकर दिया है उस साल में बादल महज 13-14 साल का था। कॉलेज प्रशासन की ओर से बालश्रम कराया जा रहा था। अनुभव पर हस्ताक्षर करने वाले राजेंद्र मेघवाल ने बताया कि बच्चा शरीर से लगता नहीं था कि नाबालिग है, वो कॉलेज में 15 से 20 मिनट सफाई करने आता था, वाॅशबेस और बाथरूम साफ करता था। वो आया तो उसका प्रमाण पत्र भूल से बना दिया।
जवाब का मुझे पता नहीं, जाने दो ना, क्या करना है आपको नोटिस दिए थे, जवाब का मुझे पता नहीं है। नियुक्तियां दे दी है, जाने दो आपको क्या करना है। - प्रभूलाल भाभोर, आयुक्त, नगरपरिषद