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तलवाड़ा हवाई पट्‌टी का होगा विस्तार, रात में भी उतर सकेंगे प्लेन

तलवाड़ा हवाई पट्‌टी का होगा विस्तार, रात में भी उतर सकेंगे प्लेन

बेणेश्वर धाम में नदी पर बनेगा हाई लेवल पुल, मुख्यमंत्री ने की बजट में घोषणा  

 मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया। इसमें वागड़ के लिए कई सौगातें दी, हालांकि बंद पड़ी बांसवाड़ा रेल परियोजना के लिए बजट में कोई घोषणा नहीं करने से थोड़ी नाराजगी जरूर हुई, लेकिन बांसवाड़ा के तलवाड़ा में हवाई पट्‌टी का विस्तार करने, वागड़ प्रयाग नाम से बेणेश्वरधाम की नदी पर 1 करोड़ की लागत से हाईलेवल पुल बनाने, सागवाड़ा में जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए कोचिंग सेंटर खोलने की घोषणा ने राहत जरूर दी। मुख्यमंत्री ने बजट में वागड़ के लिए 7 से 8 घोषणाएं की हैं। जिसमें तलवाड़ा हवाई पट्‌टी का अपग्रेडेशन और बेणेश्वर धाम में नदी पर पुल बनाने की घोषणाएं प्रमुख रही। तलवाड़ा हवाई पट्‌टी का निर्माण हरिदेव जोशी ने पहली बार मुख्यमंत्री बनने के दौरान 1971 में कराया था। अब हवाई पट्‌टी के अपग्रेडेशन के तहत यहां प्लेन के 24 घंटे लैंडिंग और टेकऑफ की सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। जिसके तहत अब यहां पर चारों तरफ रोशनी, सुरक्षा व्यवस्था सहित ठहराव के लिए रेस्ट हाउस आदि का निर्माण किया जाएगा। हालांकि सरकार की ओर से कितना बजट जारी किया जाएगा, इसका एलान नहीं किया गया है। 

1200 मीटर से 1850 मीटर तक हुआ विस्तार : शुरूआत में हवाई पट्टी की लंबाई 1200 मीटर थी। जिसके बाद समय-समय पर राज्य सरकार ने इसके विस्तार और विकास के लिए बजट घोषणा की। जिससे वर्तमान में हवाई पट्‌टी का रनवे 1850 मीटर लंबा है। हवाई पट्‌टी पर आने वाले एक से अधिक ऐरोप्लेन आने की स्थिति में उन्हें सुरक्षित रूप से खड़ा करने के लिए 90 मीटर लंबे और 35 मीटर चौड़े आकार का टैक्सी वे बना दिया है, जहां एक से अधिक ऐरोप्लेन उतरने की स्थिति में पहले आने वाले ऐरोप्लेन को टैक्सी वे पर सुरक्षित रूप से खड़ा किया जा सकेगा। जिससे बाद में आने वाले ऐरोप्लेन सुरक्षित रूप से उतर सकते हैं। हवाई पट्‌टी के सामने स्थित रेस्ट हाउस का भी रंगरोगन करवाया गया है, जहां वीआईपी के ठहरने की भी सुविधा है।  

मिलेगा आमजन काे फायदा: वागड़ के काफी लोग रोजगार और व्यापार के लिए खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। जिन्हें वर्तमान में अहमदाबाद, मुंबई, इंदौर तक बस या टैक्सी में जाना पड़ता है। यहां प्रति सप्ताह चार्टर प्लेन की अहमदाबाद तक सुविधा मिल जाती है तो उन लोगों का समय बच सकता है। इसके अलावा जिले सीमेंट, सिंटेक्स और कपड़ा उद्योगों के संचालित होने के कारण बड़े उद्योगपतियों का भी आना जाना लगा रहता है। इसके अलावा एयर स्ट्रीप पर सुविधा बढ़ने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।  
बारिश में धाम पर आना जाना आसान होगा : हर बार मानसून में बेणेश्वर धाम टापू बन जाता है। जहां श्रद्धालु अधिक बारिश में फंस जाते हैं। इसे देखते हुए सरकार ने बांसवाड़ा और डूंगरपुर को जोड़ने वाली नदी पर हाई लेवल पुल के लिए 1 करोड़ की लागत से डीपीआर बनाई जाएगी। इससे बरसात में आसानी से धाम पर श्रद्धालु दर्शन के लिए आना जाना कर सकते हैं। गौरतलब है कि लंबे समय से दोनों ही जिलों की ओर से पुल निर्माण की मांग उठाई जाती रही है।  

निजी प्लेन उतारने का किराया मात्र 1 हजार रुपए, अन्य सुविधाओं का खर्च भी तय किया  
तलवाड़ा हवाईपट्टी पर अगर कोई निजी विमान उतारता है, तो उसे मात्र 1 हजार रुपए किराया देना पड़ता है। जबकि पुलिस विभाग की एक टुकड़ी के पांच हजार, नगर परिषद के फायर ब्रिगेड के 2 हजार, हवाईपट्टी की साफ सफाई और चौकीदार का खर्च निकालना पड़ता है। इसके अलावा कोई बड़े जनप्रतिनिधि और विशिष्टजन के आने पर रेस्ट हाउस का रंगरोगन भी कराना पड़ता है।  हवाई पट्‌टी, जहां पर सबसे पहले देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादूर शास्त्री ऐरो प्लेन से आए थे। (फाइल फोटो)  
 

सागवाड़ा में खुलेगा उत्कृष्ट कोचिंग सेंटर  
जनजाति उपयोजना क्षेत्र में छात्र छात्राओं के लिए विभिन्न प्रतियाेगी परीक्षा की तैयारी और व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए सागवाड़ा में उत्कृष्ट कोचिंग सेंटर खोला जाएगा। इससे जनजाति वर्ग की गरीब परिवार की छात्राओं को स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन कराया जाएगा। छात्राओं को काेचिंग के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।  
यह घोषणाएं भी की मुख्यमंत्री ने  
 टीएपी क्षेत्र में हरिदेव जोशी केनाल और भीखाभाई नहर तंत्र विकसित करने के लिए और अन्य जल संग्रहण ढांचे और नहरी तंत्र के लिए 25 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान।  
बांसवाड़ा सहित 20 अन्य जिलों में सिंचाई सुविधाओं के विकास के लिए 517 करोड़ से 55 कार्य शुरू होंगे।  
बांसवाड़ा, टोंक, सिरोही में 36 ग्राम पंचायतों के 20 हजार किसानों के लिए प्राकृ़तिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस योजना में जागरुकता लाने के लिए प्राकृतिक खाद-बीज तैयार करने, प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट संबंधित कार्य किए जाएंगे। इस योजना में 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 

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