खाद्य पदार्थों पर शुद्ध का मतलब नहीं लिखा तो 10 लाख जुर्माना

Updated on April 22, 2019 Govt Health
खाद्य पदार्थों पर शुद्ध का मतलब नहीं लिखा तो 10 लाख जुर्माना  , Banswara "खाद्य पदार्थों के पैकेट पर नैचुरल, पारंपरिक और शुद्ध के नाम पर धड़ल्ले से लिखे जा रहे हैं। एफएसएसआई कंपनियों पर नकेल कसने के लिए नेचुरल, शुद्ध व पारंपरिक की परिभाषा तय की है। गलत दावे पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना"

फूड प्रोडक्ट कंपनी को नियमों की पालना अनिवार्य होगा  
लेबल पर स्पष्ट करना होगा ब्रांड या ट्रेड मार्क  

एफएसएसआई सख्त : प्रोडक्ट लेबल पर लिखे जाने वाले शुद्ध व नैचुरल की परिभाषा तय की ताकि हम स्वस्थ रहें  

खाद्य पदार्थों के पैकेट पर नैचुरल, पारंपरिक और शुद्ध के नाम पर धड़ल्ले से लिखे जा रहे हैं। निर्माता कंपनियां प्रोडक्ट की परिभाषा खुद तैयार कर ग्राहकों से मनमाने दाम वसूल रही हैं। लेकिन अब उपभोक्ता से खिलवाड़ नहीं किया जा सकेगा। एफएसएसआई (फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड ऑथोरिटी ऑफ इंडिया नई दिल्ली) ने कंपनियों पर नकेल कसने के लिए नेचुरल, शुद्ध व पारंपरिक की परिभाषा तय की है। कोई कंपनी गलत दावे करती है, तो उसे 10 लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है।

एफएसएसएआई ने एक जुलाई 2019 से लागू नए नियमों की पालना के आदेश दिए हैं। अभी प्रदेश में लैब की जांच में इस साल अब तक मिसब्रांड के 80 नमूने मिल चुके हैं। ज्यादा मिसब्रांड के मामले मसाले, दाल, फल-सब्जी, तेल-घी के हैं। जिनके मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। इन्हीं को देखते हुए विभाग ने यह आदेश जारी किए हैं।

किसी उत्पाद में प्राकृतिक, ताजा, शुद्व, ओरिजनल, परंपरागत, वास्तविक जैसे शब्दों से उपभोक्ता भ्रमित हो जाते हैं। ट्रेड मार्क-ब्रांड नाम में इनके इस्तेमाल को लेकर एफएसएसएआई सख्ती बरतेगा।  

नैचुरल : अब सिर्फ उन खाद्य पदार्थों के साथ प्राकृतिक शब्द का इस्तेमाल होगा जो सीधे तौर पर पौधे, मिनरल या जानवरों से प्राप्त होंगे। इनमें किसी तरह की मिलावट नहीं होनी चाहिए। 

ओरिजनल - जिन खाद्य पदार्थों के स्रोत की जानकारी आसानी से ग्राहक को मिल सकती है उसी उत्पाद के साथ इस शब्द का इस्तेमाल कर सकते है। उत्पाद की क्वालिटी और टेस्ट में वर्षों बाद भी बदलाव नहीं होना चाहिए।

पारंपरिक: पारंपरिक उत्पाद बताकर बेचने वाली कंपनियों के लिए 30 साल की समय सीमा निर्धारित की गई है। पारंपरिक कह कर बेचे जाने वालों के लिए कंपनी को साबित करना होगा कि पिछले 30 वर्षों से उत्पाद को उसी फार्मूले और तकनीक का इस्तेमाल कर बनाया जा रहा है। 

उत्पाद पर शुद्ध और नैचुरल लिखने का प्रमाण देना पड़ेगा  
नियमों का पालन नहीं करने वाली निर्माता कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही होगी। खाद्य पदार्थ विक्रेताअों को उत्पाद पर शुद्ध, नैचुरल लिखने का प्रमाण देना पड़ेगा। -डॉ.सुनील सिंह, स्टेट नोडल अधिकारी (फूड सेफ्टी) 

 

 

By Bhaskar



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