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आवासीय स्वीकृति पर चला रहा वर्धमान मेटरनिटी अस्पताल तो दूसरी तरफ नरेश तलदार ने 1 मंजिल की इज़ाज़त लेकर की तीन मंजिला इमारत बना दी

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    आवासीय स्वीकृति पर चला रहा वर्धमान मेटरनिटी अस्पताल तो दूसरी तरफ नरेश तलदार ने 1 मंजिल की इज़ाज़त लेकर की तीन मंजिला इमारत बना दी
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शहर में अवैध निर्माण को लेकर नगरपरिषद कितनी गंभीर है इसका ताजा उदाहरण हाल ही में परिषद की ओर से दो बहुमंजिला इमारतों के निर्माण और इस्तेमाल पर जारी किए गए नोटिस से साफ पता चलता है। परिषद ने एक बिल्डिंग मालिक को बिना स्वीकृति निर्माण करने पर नोटिस जारी किया, लेकिन जानकर हैरानी होगी कि यह निर्माण सालों पहले का है। 

इसी प्रकार एक आवासीय भवन में कॉमर्शियल इस्तेमाल कर टैक्स चोरी पर भी 6 माह बाद परिषद की नींद खुली है। दोनों ही मामलों में परिषद केवल नोटिस जारी करने का ही काम कर रही है। इससे साफ पता चलता है कि शहर में पहले खुद परिषद के अधिकारी अवैध निर्माण पर आंखू मूंद देते हैं और फिर बाद में खुद को बचाने के लिए नोटिस जारी कर औपचारिकता करते हैं। 

इन 2 उदाहरण से समझे नगर परिषद की लापरवाही 

केस-1 

पहला मामला ठीकरिया वर्धमान मेटरनिटी अस्पताल का है। 3 मंजिला आवासीय भवन बनाने की आड़ में अस्पताल चलाकर यहां राजस्व चोरी की जा रही है। नगर परिषद के अधिकारी कितने संजीदा है कि आवासीय भवन में अस्पताल शुरू किए 6 महीने बीतने के बाद अब नोटिस जारी किया है। ठीकरिया गांव के शैलेंद्र पुत्र धनपाल जैन ने भूमि आवासीय निर्माण के लिए आवेदन किया था। जिस पर नगर परिषद ने प्रोजेक्शन आधार पर निर्धारित शुल्क प्राप्त कर आवासीय निर्माण की स्वीकृति दे दी। लेकिन शैलेंद्र जैन की ओर से उस जमीन पर अपने निजी फायदे और आय के लिए वर्धमान मेटरनिटी अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया है, जिससे सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व नुकसान हो रहा है। इसमें नगर परिषद के अधिकारियों की मिलीभगत इससे भी स्पष्ट होती है कि निर्माण हुए डेढ़ साल का समय बीत चुका हैं और अस्पताल का संचालन शुरू किए हुए करीब 6 माह बीत चुके हैं, फिर भी नगर परिषद की ओर से अस्पताल मालिक के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया है। जबकि शहर सहित जिलेभर से सैकड़ों लोग रोजाना इलाज और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। 

अतिक्रमण पर नगरपरिषद कितनी गंभीर ,इसका प्रमाण यह दो भवन, निर्माण पर निर्माण पर होते रहे, दिखे नहीं 

हो रही लाखों की वाणिज्यिक शुल्क की चोरी 

शैलेंद्र पुत्र धनपाल जैन के नाम ठीकरिया ग्राम पंचायत में करीब 10 हजार स्क्वेयर मीटर का आवासीय भूखंड आवंटित हैं। शैलेंद्र की ओर से चारदीवारी का निर्माण कर 4120 स्क्वेयर मीटर पर आवास निर्माण की स्वीकृति मांगी गई थी। नगर परिषद की ओर से 6 जुलाई 2017 को 3 लाख 46 हजार, 563 रुपए प्रोजेक्शन शुल्क प्राप्त कर शैंलेंद्र को स्वीकृति दी गई थी। डीएलसी दर के आधार पर शुल्क देखा जाए तो आवासीय भूखंड पर अस्पताल बनाकर शैलेंद्र जैन की ओर से करीब 8 लाख रुपए से ज्यादा की शुल्क चोरी करना सामने आता है। नगर परिषद की ओर से इस मामले में पिछले वर्ष नवंबर में ही शैलेंद्र जैन को नोटिस जारी किया गया था। जिसमें आवासीय भूखंड पर स्वीकृति के विपरीत अस्पताल बनाने को असंवैधानिक बताया। नगर परिषद की ओर से इस मामले में व्यावसायिक भू रूपांतरण के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था। नोटिस के 5 माह से अधिक समय हो गया है, कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 


भूतल और प्रथम मंजिला निर्माण की स्वीकृति दी गई थी 

केस 2 

दूसरा मामला शहर के बांसवाड़ा-डूंगरपुर मार्ग पर स्थित सुभाष नगर क्षेत्र में नरेश तलदार ने की तीन मंजिला इमारत से जुड़ा है। यहां नगर परिषद की स्वीकृति के बगैर की बहु मंजिला इमारत खड़ी कर दी है। इस भवन निर्माण किए काफी समय गुजर चुका है। आयुक्त प्रभुलाल भाभोर ने 12 मार्च को इस सबंध में नोटिस जारी किया है जिसमें बताया कि सुभाष नगर के भूखंड संख्या 143 पर भवन निर्माण के लिए परिषद की ओर से भूतल और प्रथम मंजिला निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। जबकि मौके पर तलदार की ओर से ग्राउंड फ्लोर के साथ तीन मंजिलें खड़ी कर दी हैं। आयुक्त ने अतिरिक्त निर्माण की स्वीकृति के दस्तावेज 3 दिन के भीतर जमा कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा कि दस्तावेज जमा नहीं कराने पर राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 194 के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

कॉमर्शियल इस्तेमाल पर भी फंस सकते हैं तलदार 

नरेश तलदार की ओर से न सिर्फ अवैध निर्माण किया है बल्कि उनके द्वारा आवासीय स्वीकृति का भी दुरुपयोग किया जा रहा। परिषद ने उस भवन में रहने की स्वीकृति दी हैं, जबकि उनकी बिल्डिंग में कोचिंग संस्थानों और अन्य क्लासेज के संचालन कराकर अतिरिक्त आय जुटाई जा रही है। वर्तमान में वहां पर इंग्लिश स्पीकिंग अौर लर्निंग के लिए अमेरिकन क्लासेज का संचालन हो रहा है। संचालकों के अनुसार यह क्लासेज 2 से 3 माह से इस बिल्डिंग में संचालित हैं। आसपास के लोगों कहना है कि पूर्व में भी यहां पर कुछ संस्थान संचालित थे। 

ये अधिकार महज कागजों में दफन यह है धारा 194 में प्रावधान 

पालिका पालिका अधिनियम 2009 की धारा 194 के तहत 250 वर्गमीटर तक के आवासीय भवनों को भवन विनिमय अनुरूप निर्माण करने की स्वीकृति की जरूरत नहीं है। लेकिन ऐसे भवनों में यदि पैरामीटर्स की पालना नहीं की जाती है तो नियमानुसार नोटिस देकर सुनवाई का मौका दिया जाता है। इसके बाद सीज करने और निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। 

 

By Bhaskar

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