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हमारी महिलाएं लेबर रूम में रोज सुनती हैं अपशब्द, ऐसा तिरस्कार झेलती हैं हमारी महिलाएं जिसकी पुरुष कल्पना भी नहीं कर सकते

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    लेबर रूम का सच की पहली कड़ी में आपने पढ़ा कि किस तरह सफाई कर्मचारी ही सरकारी अस्पतालों में प्रसव करवा रहे हैं। आज दूसरी कड़ी में पढ़िए- वो भाषा...जो हमारी महिला
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जिन मुद्दों पर कल तक चुप्पी थी, वो अब टूटेगी 
पहली बार वो जानलेवा भाषा जिसे सुनकर नसें चटक जाए...हमारी महिलाएं इसे लेबर रूम में रोज सुनती हैं...

आनंद चौधरी/अनुराग बासिड़ा|जयपुर  

भारतीय संस्कृति में बच्चे का जन्म उत्सव की तरह मनाया जाता है। उसके आने की खुशी में मंगल गीत गाए जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि लेबर रूम में जब जीवन अवतार ले रहा होता है तो उसका स्वागत गालियों से होता है। ऐसी अभद्र भाषा...ऐसा तिरस्कार झेलती हैं हमारी महिलाएं जिसकी पुरुष कल्पना भी नहीं कर सकते।  

लेबर रूम का सच की पहली कड़ी में आपने पढ़ा कि किस तरह सफाई कर्मचारी ही सरकारी अस्पतालों में प्रसव करवा रहे हैं। आज दूसरी कड़ी में पढ़िए- वो भाषा...जो हमारी महिलाएं लेबर रूम में सुनने को मजबूर होती हैं। जिस समय उन्हें अपनेपन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस समय वे गालियां सुन रही होती हैं...जैसे मां बनना जीवन की सबसे बड़ी गलती हो।  

भास्कर टीम ने 28 दिन तक 13 जिलों के 98 लेबर रूम्स की पड़ताल की। टीम की महिला सहयोगियों ने दिन के दस-दस घंटे लेबर रूम के आसपास बिताए। तब जाकर लेबर रूम का सच बाहर आ सका। टीम ने देखा- लेबर रूम्स में जब-जब प्रसूताओं की चीख निकलती है तब-तब उस प्रसूता को नर्सो-डॉक्टर की गालियां सुनने को मिलती हैं। इतना ही नहीं, महिलाओं की चीख को दबाने के लिए नर्से उनके बाल खींचती हैं। चांटे तक मारती हैं...लेबर रूम को टॉर्चर रूम जैसा बना देती हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट  

खबर पर अपनी प्रतिक्रिया 9928302969/ 9414486444 पर वॉटसअप के जरिए दे सकते हैं। आप लेबर रूम से जुड़ा अपना दर्द भी साझा कर सकते हैं।  

डिस्क्लेमर : मुद्दा महिलाओं की निजता से जुड़ा है। भास्कर इसका सम्मान करता है। इसलिए इस खबर के लिए भास्कर का कोई भी पुरुष रिपोर्टर लेबर रूम्स के अंदर नहीं गया। स्टिंग में बाल व महिला चेतना समिति भीलवाड़ा की अध्यक्ष तारा अहलुवालिया व उनकी सहयोगी अनिता ने भास्कर के लिए लेबर रूम्स की तस्वीर कैमरों में कैद कीं।  


#लेबर रूम की कहानी...शब्दों से सबसे गहरा घाव  

कैंची बोली : मैं कुछ भी काट सकती हूं...लहूलुहान कर देती हूं। चाकू पलटा, बोला : तुम क्या हो...सबसे गहरा घाव मैं देता हूं। शब्द क्रूरता से हंस दिए। कहा-तुम दोनों कितने भोले हो...  


बाल खींचे, चांटे मारते हुए नर्सें बोली..सा$, कमी# क्यों चीख रही है, मर क्यों नहीं जाती  

लेबर रूम में पेट पर चढ़कर डिलीवरी करा रही हैं नर्सें  

22 जनवरी का दिन, वक्त रात साढ़े आठ बजे। जगह- भीलवाड़ा का राजकीय चिकित्सालय। तस्वीर लेबर रूम के अंदर की है। दर्द से चीख रही प्रसूता के डिलीवरी के लिए एक नर्स उसके पेट पर चढ़ी हुई है। ताकि दबाव बनाकर प्रसव करा सके। यही तस्वीर सबूत है कि यह नर्स प्रशिक्षित नहीं है।...इस संबंध में भास्कर ने जब स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम बाफना से बात की तो उन्होंने कहा- कई बार बच्चा फंस जाने पर अनट्रेंड स्टाफ पेट पर जोर लगाकर डिलीवरी की कोशिश करता है जो सही प्रेक्टिस नहीं है। बहुत ज्यादा जोर लगाने से बच्चेदानी फट सकती है या नीचे आ सकती है। आमतौर पर इस तरह की कोशिश वहीं ज्यादा होती है जहां ट्रेंड स्टाफ या उपकरण मौजूद नहीं होते।  

स्थान : महाराणा भूपाल अस्पताल, उदयपुर  

समय : रात 11.05 मिनट, 24 जनवरी  

पड़ी रहने दो इसे, रात 1 बजे अपने आप फट जाएगी सा*  
लेबर रूम से अचानक रोना-चीखना बढ गया। तो जवाब में नर्स चिल्लाई : मुझे गुस्सा मत दिलाओ, गुस्सा आ गया तो मार डालूंगी...सा* को। प्रसूता दोनों हाथों से मुंह बंद कर लेती है। पर आंखों से निकल रहे आंसू दर्द नहीं रोक पाते। अब दूसरी टेबल पर प्रसूता चीख रही है। नर्स कहती है - मर जा कहीं जाकर। साथ आई परिजन को डांटते हुए बोली- इसको यहीं पड़े रहने दो, रात एक बजे तक अपने आप फट जाएगी सा* । यहां छह लेबर टेबल थी और प्रसूताओं की तादाद 20 से भी ज्यादा। कई प्रसूताओं को तो तीन घंटे से प्रसव के इंतजार में फर्श पर लिटा रखा था।  

लेबर रूम का स्टिंग ऑपरेशन : भास्कर के समाचार को हाईकोर्ट ने लिया रिकॉर्ड पर  
लीगल रिपोर्टर. जोधपुर। लेबर रूम में सफाईकर्मियों द्वारा डिलीवरी के भास्कर स्टिंग हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया। न्यायमित्र राजवेंद्र सारस्वत ने कोर्ट से आग्रह किया, कि इस संवेदनशील मामले को बांसवाड़ा में नवजात शिशुओं की मौत को लेकर विचाराधीन सॉ मोटो पिटीशन के साथ सुना जाए और समाचार को रिकॉर्ड पर लिया जाए। सारस्वत ने जल्दी सुनवाई का भी प्रार्थना पत्र भी पेश किया। कोर्ट ने समाचार को रिकॉर्ड पर लेते हुए जल्दी सुनवाई के प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को सुनवाई मुकर्रर की है। उल्लेखनीय है, कि बांसवाड़ा क्षेत्र में ही वर्ष 2017 में दो महीने में करीब 90 नवजात शिशुओं की मौत को लेकर हाईकोर्ट ने प्रसंज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज कर रखी है।  

स्थान : महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा  

समय : रात 8:30..। 22 जनवरी  

खुद जोर नहीं लगा सकती तो अपने पति को बुला ले  
एक नर्स प्रसूता के साथ उसके पेट पर दोनों हाथों से जोर-जोर से धक्का लगा रही थी। हमारी सहयोगी तारा ने जब उसे समझाना चाहा तो बोली - डिलीवरी कैसे करानी है, मुझे मत सिखाओ। दूसरी लेबर टेबल पर नर्स परिजनों पर िचल्ला रही थी। पहले उसने जोर से पूछा इसके साथ कौन है, जब कोई नहीं बोला तो डांटकर बोली -भाड़ में जाओ, कहां-कहां से आ जाती है मरने। 23 जनवरी को हम फिर यहां पहुंचे। एक प्रसूता चीख रही थी तो नर्स बोली - जितना जोर चीखने में लगा रही है उतना बच्चे को धकेलने में लगा। खुद जोर नहीं लगा सकती तो अपने पति को बुला ले, वह आकर जोर लगा देगा।  

स्थान : रा. चिकित्सालय, विजयनगर  

समय : दोपहर 3 बजे। 27 जनवरी  

हर साल आ जाती है 1400 रु. लेने, शर्म तो तुझे आती नहीं  
यहां महिला वार्ड में एक नंबर बैड पर लेटी प्रसूता ने बताया- मुझे तो अब भी डर लग रहा है। मैं लेबर टेबल पर लेटी दर्द से रो रही थी, नर्स ने सांत्वना देने की बजाय इतने जोर से डांटा कि मेरी कंपकंपी छूट गई। उसने कहा था - क्योंं पूरे अस्पताल को सिर पर उठा रखा है, तू अकेली तो बच्चा पैदा कर नहीं रही, चुप होजा नहीं तो धक्के मारकर निकाल दूंगी। प्रसूता ने बताया- दूसरी टेबल पर लेटी महिला से तो और भी बुरा बर्ताव हुआ। नर्स ने कहा-हर साल 1400 रु लेने आ जाती है। शर्म तो तुझे आती नहीं। प्रसूता ने कहा- इस तरह का बर्ताव देखकर सरकारी व्यवस्था से मेरा भरोसा ही उठ गया। 

 

By Bhaskar

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