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टेक्सटाइल में देश का सबसे बड़ा सोलर ऊर्जा का प्लांट बांसवाड़ा में बनेगा, 11 मेगावाट बिजली रोजाना बनेगी 

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    Country biggest textile solar plant will become in Banswara
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टेक्सटाइल उद्योग में पहला प्रयोग, एलएनजे ग्रुप की मयूर मिल लोधा ने 75 बीघा जमीन में लगाया प्लांट, पहले इतनी बिजली बनाने के लिए सालाना 55 हजार पेड़ों जितना कोयला जलाया जाता था 

दीपेश मेहता| बांसवाड़ा 

मयूर टेक्सटाइल मील मोरड़ी में 75 बीघा जमीन में सोलर ऊर्जा का प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इससे रोजाना 11 मेगावाट बिजली बनाई जाएगी। कंपनी का दावा है कि देश में टेक्सटाइल के क्षेत्र में सोलर ऊर्जा का यह सबसे बड़ा प्लांट होगा। साथ ही यह टैक्सटाइल क्षेत्र में इस प्रकार का पहला प्रयास है जो थर्मल के साथ चलेगा, वो भी कैप्टिव उपयोग के लिए। इस प्लांट की लागत करीब 54 करोड़ रुपए है। इसके लिए सिंगापुर से सोलर पैनल मंगवाए गए हैं। इसकी खास बात यह होगी कि धूप कम निकलने पर भी इससे बिजली बनेगी। यह प्लांट लगाने से पहले मील द्वारा कोयले का उपयोग करके थर्मल प्लांट से बिजली बनाई जाती थी। जिसमें काफी मात्रा में कोयला जलता था। अगर विशेषज्ञों की माने तो एक साल में करीब 55 हजार पेड़ों के बराबर कोयला इतनी बिजली बनाने के लिए जलाया जाता था। जो अब नहीं जलेगा। इस प्लांट से बिजली बनाने का खर्चा तो बचेगा ही साथ ही पर्यावरण को भी फायदा होगा। हालांकि फिलहाल कंपनी की ओर से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है। जो सिर्फ 3.6 मेगावाट है। लेकिन कंपनी मार्च 2019 तक इस प्लांट से 11 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगी। बांसवाड़ा का यह अकेला प्लांट नहीं है, एलएनजे भीलवाड़ा उद्योग समूह के भीलवाड़ा स्थित प्लांट में भी इस तरह से सोलर प्लांट डाला जा रहा है। 

2017 में किया था पहला प्रयोग अब भीलवाड़ा में बनेगा 8 मेगावाट का प्लांट 
मयूर टैक्सटाइल की ओर से भीलवाड़ा के खारिग्राम (भीलवाड़ा) ईकाई पर 8 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगाया जा रहा है। कंपनी के मुख्य संचालन अधिकारी(पावर) नरेश कुमार बहेडिया ने बताया कि बिजली का उत्पादन जनवरी 2019 मे शुरू हो जाएगा। इससे पहले मार्च 2017 में एलएनजे ग्रुप की कान्याखेड़ी (भीलवाड़ा) यूनिट में 1.8 मेगावाट क्षमता एवं मंडपम (भीलवाड़ा) यूनिट 1.82 मेगावाट के रूफ टॉप सोलर पावर सिस्टम से बिजली बनाने का काम शुरू है।

ग्रीन पावर क्षेत्र में पहला कदम : बहेड़िया ने बताया कि कार्बन इमीशन कम करने के उद्देश्य से थर्मल के साथ 11 मेगावाट सोलर देश की पहली एवं अनूठी योजना है। जो थर्मल पावर प्लांट के साथ चलेगी। इस परियोजना के शुरुआत के साथ ही कंपनी ने ग्रीन पावर के क्षेत्र की ओर कदम बढ़ाया है। बांसवाड़ा का प्लांट शुरू होने के बाद कुल सोलर पावर क्षमता 22.62 मेगावाट हो जाएगी। जो भारत के वस्त्र उद्योग के साथ स्व उपयोग के लिए सबसे बड़ी योजना है। 22.62 मेगावाट की परियोजना की लागत करीब 97 करोड़ रुपए है। इसके अलावा बहेड़िया ने कहा कि प्रदेश के टेक्सटाइल उद्योग की मांग रही है कि सौर ऊर्जा टीयूएफ स्कीम का हिस्सा बने और रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध हो, राज्य में अलग से कैप्टिव सोलर पावर नीति बने ताकि इस क्षेत्र में उपस्थित अपार संभावनाएं पूरी हो सके।

सोलर से बनी बिजली के कारण बचेंगे 1.25 लाख पेड़ 
बहेड़िया ने बताया कि कंपनी के सभी प्लांट की कुल बिजली जो सोलर से बन रही है इसे जोड़ा जाए तो 22.62 मेगावाट होती है। इसे बनाने के लिए अब थर्मल में कोयले का उपयोग किया जाता था। लेकिन, सोलर से बिजली बनने के कारण करीब 1.25 लाख पेड़ बचेंगे। क्योंकि फिर कोयला नहीं जलाना होगा। हालांकि कंपनी को इससे कई ज्यादा बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन यह जो बिजली बन रही है यह उसमें बहुत उपयोगी है। साथ ही यह लागत को भी कम करता है। इसके अलावा कंपनी ने जैसलमेर में मार्च 2013 से 20 मेगावाट क्षमता के विंड पावर पावर स्टेशन से अनुबंध भी किया है। जहां हवा से बिजली बनाई जा रही है। 

 

By Bhaskar

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