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क्या कहती है अशोक गहलोत की शपथ ग्रहण कुंडली, राजस्थान की नई सरकार के हाल

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Rajasthan December 18, 2018 - राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत के बाद कांग्रेस पार्टी में अब मुख्यमंत्री पद को लेकर मची गहमागहमी समाप्त हो गई हैl राजस्थान में अशोक गहलोत, मध्यप्रदेश में कमलनाथ और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के अनुभव को पार्टी ने युवा नेताओं पर तरजीह दी है। मिडिया पंडितों ने अशोक गहलोत और कमलनाथ की संभावित ताजपोशी की ज्योतिषीय भविष्यवाणी नवंबर महीने में ही कर दी थी। अब देखते हैं कि ‘मलमास’ में शपथ ले रहे इन कांग्रेस के दिग्गजों का मुख्यमंत्री के रूप में राजनीतिक भविष्य कैसा रहेगा।

मलमास में शपथ कैसा रहेगा अशोक गहलोत का राज-स्थान - वैदिक ज्योतिष के मुहूर्त खंड में सूर्य के धनु और मीन राशियों में गोचर के समय को ‘मलमास’ कहते हैं। यह समय विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता। सूर्य के धनु और मीन में गोचर के समय विवाह, गृह प्रवेश, नए कार्यों का आरंभ आदी नहीं किया जाताl ऐसे में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों का इस समय शपथ ग्रहण करना कैसा रहेगा, यह जानने के लिए उनकी मुहूर्त कुंडलियों के साथ-साथ उनकी जन्म-कुंडलियों का भी विश्लेषण आवश्यक है। देखते हैं अशोक गहलोत की कुंडली क्या कहती है, कैसा रहेगा इनका कार्यकाल, क्या पार्टी के सदस्यों के पूरा सहयोग मिल पाएगा?

अशोक गहलोत की कुंडली कहती है - बीते कल 17 दिसंबर की सुबह राजस्थान के जयपुर में 10 बजकर 30 मिनट पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर रहे अशोक गहलोत को मुहूर्त में मकर लग्न मिला है, जो कि चर राशि होने के कारण उनको बेहद जल्द बड़ी चुनौतियों से रूबरू कराएगा। मुहूर्त कुंडली के दशम भाव में पड़ा योगकारक शुक्र उनकी छवि को हमेशा की भांति बेदाग रखेगा किन्तु वह शनि और सूर्य हानि के 12 वें घर में फंस गए हैं जिससे उनको अपनी ही पार्टी में असंतोष का सामना करना पड़ेगा। मुहूर्त कुंडली के लाभ भाव में राशि और नवांश दोनों में शुभ ग्रहों का तालमेल अशोक गहलोत को राज्य में बेरोजगारी और राजस्व में कमी की समस्या पर काफी हद तक काबू पाने में मदद करेगा। किन्तु लग्न में पड़ा केतु और ‘पाप-कर्तरी’ योग उनको अपनी ही पार्टी में परेशानी देगा। लग्न से दूसरे घर में पड़ा मंगल और बाहरवें घर में पड़े सूर्य-शनि की अशुभ स्थिति पाप-कर्तरी योग कर निर्माण कर रहे हैं। इस बुरे योग के प्रभाव से अशोक गहलोत का स्वस्थ्य काम के बोझ और पार्टी की भीतरी कलह के कारण प्रभावित होगा l

सचिन पायलट का शूल योग देगा कठिनाई - अशोक गहलोत का जन्म 3 मई 1951 को सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। मिथुन लग्न की उनकी कुंडली में चंद्रमा मीन राशि में है, जो कि संजोग से उनके शपथ ग्रहण के समय भी मीन राशि में स्थित होकर गुरु से दृष्ट हैl उनकी जन्म कुंडली का प्रबल गजकेसरी योग तथा महूर्त कुंडली में चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि योग का तालमेल उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आने देगा। किन्तु अशोक गहलोत के जन्म लग्न मिथुन का उनके उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के जन्म लग्न वृश्चिक से 6 /8 की बुरी स्थिति में होना आनेवाले दिनों में सरकार चलाने को लेकर खुलकर मतभेद उजागर करेगा।

2019 में अशोक गहलत कर पाएंगे यह काम - सचिन पायलट की वृश्चिक लग्न की कुंडली में बना शूल योग अशोक गहलोत की मिथुन लग्न की कुंडली के केदार योग से बिल्कुल भिन्न है l अशोक गहलोत की कुंडली में सभी ग्रह चार राशियों में होकर उनको केदार योग के फलस्वरूप एक शांत और नम्र व्यक्ति बनाते हैं। तो वहीं, सचिन पायलट की कुंडली में सभी ग्रहों का तीन राशियों में होकर शूल योग का निर्माण करना उनको कुछ उग्रता और उतावलापन देगा, जिससे सरकार के भीतर तनातनी रहेगी। अगले वर्ष अगस्त के महीने में राहु की महादशा में आ रहे अशोक गहलोत बाद में अपने राजनैतिक चातुर्य के बल पर विवादों को काफी हद तक काबू  पाने में सफल हो जाएंगेl किन्तु अगस्त 2019 तक का समय अशोक गहलोत को सचिन पायलट से कुछ उलझाए रखेगाl

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