भारतीय नव वर्ष

06-04-2019

Updated on April 6, 2019

भारत में कई वर्ष पूर्व एक राजा हुए थे जिनका नाम महाराजा विक्रम था, महाराजा विक्रम के नाम पर ही भारतीय वर्ष का नाम विक्रम वर्ष रखा गया था। यह वर्ष विक्रम वर्ष 2076 है। महाराजा विक्रम से पूर्व वर्ष भगवान कृष्ण के नाम पर था।

भारत का नव वर्ष

भारत का नव वर्ष ब्रह्माण्ड पर आधारित होती है, और यह ब्रह्माण्ड के आधार पर चलता है और यह तब शुरु होता है जब सूर्य या चंद्रमा मेष के पहले बिंदु में प्रवेश करते हैं। चंद्रमा के मेष राशि में प्रवेश करने पर नव वर्ष माना जाता है और कुछ दिन बाद सूर्य जब मेष राशि के पहले बिंदु में प्रवेश करेगा, जिस दिन हम बैसाखी मनाते हैं, यह भी एक नए साल का दिन है। इसलिए भारत के आधे भाग में नव वर्ष चंद्रमा के आधार पर मनाया जाता है और आधे भाग में सूर्य के आधार परमनाया जाता है, इनमें कोई समानता नहीं है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अपने अनुसार नव वर्ष मनाने के लिए स्वतंत्र है।

पंजाब (ਵਿਸਾਖੀ - Vaisakhi), बंगाल ( পয়লা বৈশাখ - Poila/Pohela Baishakh) , उड़ीसा (Pana Sankranti), तमिलनाडु (புத்தாண்டு, Puthandu), असम (বিহু - Bihu) और केरल राज्यों में नव वर्ष सौर कैलेण्डर के अनुसार मनाया जाता है इस दिन बैसाखी होती है। कर्नाटक (ಯುಗಾದಿ - Yugadi), महाराष्ट्र (गुढीपाडवा - Gudi Padwa), आंध्र प्रदेश (ఉగాది -Ugadi) और कई अन्य भारतीय राज्यों में चन्द्रमा के आधार पर उत्सव मनाते हैं।

नीम के पत्ते और गुड़ का महत्व।

नए वर्ष के दिन, परंपरा के अनुसार थोड़ी नीम के पत्ते, जो बहुत कड़वे होते हैं और गुड़, जो मीठा है, को मिलाकर खाया जाता है। इसका अर्थ यह है कि जीवन कड़वा और मीठा दोनों प्रकार का है और आपको दोनों को ही स्वीकार करना होगा।

क्या आप जानते हैं कि सभी महीनों और दिनों के नाम संस्कृत में हैं?। 

सप्ताह के दिनों को सात ग्रहों के नाम पर रखा गया था। जैसे कि आप कहते हैं

  • रविवार, तो यह सूर्य का दिन है
  • सोमवार चंद्रमा का दिन है।
  • मंगलवार मंगल है,
  • बुधवार बुध है,
  • गुरूवार बृहस्पति होता है,
  • शुक्रवार शुक्र है और
  • शनिवार को शनि का दिन है।

ये सात ग्रह हैं जिनके नाम पर सप्ताह के दिनों के नाम दिए गए थे। दरअसल, यह सब संस्कृत में है। प्राचीन कैलेंडर, प्राचीन भारत में संस्कृत में बनाया गया था; वहां से यह कैलेण्डर मिस्र (Egypt) को गया।

बारह महीनों के नाम बारह राशि चिन्हों के नाम पर रखे गए थे, अर्थात् प्रत्येक नक्षत्र में सूर्य की स्थिति (मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या; आदि इसी प्रकार से, महीनों के नामों की व्यवस्था की गई थी)। इस प्रकार, महीनों के नाम संस्कृत के शब्दों के अनुरूप हैं।

दशअंबर दिसंबर है; दश का अर्थ संस्कृत में दस होता है, अंबर का अर्थ है आकाश, दशंबर का तात्पर्य दसवें आकाश से है। नवअंबर नवंबर है, जिसका तात्पर्य है नौंवा आसमान। अक्तूबर अष्टमबर है, तात्पर्य आठवें आसमान से है। सितंबर का तात्पर्य सातवें आसमान से है। देखिए, यदि सिर्फ एक ही शब्द ऐसा हो तो इसे संयोग माना जा सकता है परंतु यदि सभी नाम इसी प्रकार से मिलते हैं तो यह संयोगवश नहीं हो सकता।

शष्ठ का अर्थ होता है छठवाँ, अर्थात्, अगस्त यह आठवाँ महीना नहीं है, अगस्त छठा महीना है (यदि आप मार्च से शुरू करते हैं)। यदि आप फरवरी में आते हैं, तो हम अक्सर कहते हैं कि साल का अंत खत्म होता है! फरवरी माह का आखिरी महीना है, बारहवाँ महीना। मार्च नए साल का पहला महीना है।

चंद्र नववर्ष और चंद्र कैलेंडर क्या है ?

 चंद्र कैलेंडर के अनुसार महीनों के नाम हैं: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, अषाढ, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन। चंद्र कैलेंडर में हर महीने का नाम ब्रह्मांड में हमारी आकाश गंगा के 27 सितारों से मेल खाता है। दो और एक चौथाई सितारे से मिलकर एक नक्षत्र बनता है। इस संख्या को 12 से गुणा करने पर यह 27 सितारों के बराबर आती है।

जब पूर्णिमा का चांद स्पष्ट रूप से सितारों में से किसी एक सितारे के पास आ जाता है, तो उस महीने को उस तारे के नाम से जाना जाता है उदाहरण के लिए, चित्रा के नाम से एक तारा है। जब पूर्णिमा का चांद चित्रा के पास आता है, तो यह चंद्र कैलेंडर का पहला महीना है, अर्थात चैत्र अगला महीना वैशाख का होगा। आश्चर्यजनक है, कि चंद्रमा किस सितारे के नीचे आ रहा है यह देखने के लिए कितनी सटीक गणना की जाती थी, और महीनों की गणना भी कैसे की जाती है।

चंद्र कैलेंडर में, एक महीने में केवल 27 दिन होते हैं। इसलिए, हर 4 सालों में, एक लौंद का महीना होता है, अर्थात् एक अतिरिक्त महीना। जैसे लौंद वर्ष में, आपको फरवरी में 29 दिन मिलते हैं; चंद्र कैलेंडर में, आपको लौंद का एक महीना (Leap month) मिलता है, अर्थात् एक अतिरिक्त महीना।

सौर कैलेंडर में, अंग्रेज़ी कैलेंडर की तरह ही केवल एक दिन अतिरिक्त मिलता है। कभी-कभी, बैसाखी 13 अप्रैल को आती है, और कभी 14 अप्रैल को है। चार वर्षों में एक बार एक दिन का अंतर आता है।

 

शाखों पर सजता नए पत्तों का श्रृंगार
मीठे पकवानों की होती चारों तरफ बहार
मीठी बोली से करते, सब एक दूजे का दीदार
चलो मनाएं हिन्दू नव वर्ष इस बार


नौ दुर्गा के आगमन से सजता है नव वर्ष
गुड़ी के त्योहार से खिलता हैं नव वर्ष
कोयल गाती हैं नववर्ष का मल्हार
संगीतमय सजता प्रकृति का आकार
चैत्र की शुरूआत से होता नव आरंभ
यही हैं हिन्दू नव वर्ष का शुभारंभ


घर में आए शुभ संदेश
धरकर खुशियों का वेश
पुराने साल को अलविदा है भाई
है सबको नवीन वर्ष की बधाई


दोस्तों गुड़ी पड़वा आया
अपने साथ नया साल लाया
इस नए साल में आओ
मिलकर सब गले और
मनाए गुड़ी पड़वा दिल से
हैप्पी गुड़ी पड़वा


नए पत्ते आते है वृक्ष खुशी से झूम जाते हैं
ऐसे मौसम में ही तो नया आगाज़ होता हैं
हम यूं ही हैप्पी न्यू ईयर नहीं मनाते हैं
हिन्दू धर्म में यह त्योहार प्राकृतिक बदलाव से आते हैं
हिन्दू नव वर्ष की शुभकामनाएं


हिन्दू नव वर्ष की शुरूआत नवरात्रि से
नौ दुर्गा के आगमन से सजता हैं नव वर्ष
गुड़ी के त्योहार से खिलता हैं नव वर्ष
कोयल गाती है नववर्ष का मल्हार
संगीतमय सजता प्रकृति का आकार
चैत्र की शुरूआत से होता नव आरंभ
यही हैं हिन्दू नव वर्ष का शुभारंभ


चारों तरफ हो खुशियां ही खुशियां
मीठी पूरन पोली और गुजियां ही गुजियां
द्वारे सजती सुंदर रंगोली की सौगात
आसमान में हर तरफ पतंगों की बारात
सभी का शुभ हो नव वर्ष हर बार
हिंदू नए वर्ष की शुभकामनाएं


ऋतु से बदलता हिन्दू साल
नए वर्ष की छाती पर मौसम में बहार
बदलाव दिखता प्रकृति में हर तरफ
ऐसे होता हिन्दू नव वर्ष का त्योहार


हिंदू नव वर्ष की है शुरूआत
कोयल गाए हर डाल-डाल पात-पात
चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा का है अवसर
खुशियों से बीते नव वर्ष का हर एक पल


मुबारक हो तुम्हे नववर्ष का महीना
चमको तुम जैसे फाल्गुन का महीना
पतझड़ न आए तेरी जिन्दगी में
यही हैं दोस्त अपनी तमन्ना

टिप्पणियां


आया झूम कर नया साल
लाया खुशियां हज़ार
खुश रहे आप हर हाल
मुबारक हो आपको नया साल


नव-वर्ष की पावन बेला में
है यही शुभ संदेश
हर दिन आए
आपके जीवन में
लेकर खुशियां विशेष
हिंदू नए वर्ष की शुभकामनाएं

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