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January, 2019

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मकर संक्रांति
14-01-2019

मकर संक्रांति (Makar Sankranti)

Makar Sankranti is a Hindu festival celebrated in almost all parts of India and Nepal in a myriad of cultural forms. It is a harvest festival.

Makar Sankranti marks the transition of the Sun into the zodiac sign of Makara rashi (Capricorn) on its celestial path. The day is also believed to mark the arrival of spring in India and is a traditional event. Makara Sankranthi is a solar event making one of the few Indian festivals which fall on the same date in the Gregorian calendar every year: 14 January, with some exceptions when the festival is celebrated on 13 or 15 January.

आत्मोद्धारक व जीवन-पथ प्रकाशक पर्व – मकर संक्रांति
जिस दिन भगवान 🌞 सूर्यनारायण उत्तर दिशा की तरफ प्रयाण करते हैं, उस दिन नारायण (मकर संक्रांति) का पर्व मनाया जाता है | इस दिन से अंधकारमयी रात्रि कम होती जाती है और प्रकाशमय दिवस बढ़ता जाता है | उत्तरायण का वाच्यार्थ है कि सूर्य उत्तर की तरफ, लक्ष्यार्थ है

सम्यक क्रांति.... ऐसे तो हर महीने संक्रांति आती है लेकिन मकर संक्रांति साल में एक बार आती है | उसी का इंतजार किया था भीष्म पितामह ने | उन्होंने उत्तरायण काल शुरू होने के बाद ही देह त्यागी थी |

पुण्यपुंज व आरोग्यता अर्जन का दिन
🌞 संक्रांति का स्नान हमें रोगों आदि से मुक्त करता है| संक्रांति के दिन उबटन लगाये, जिसमे काले तिल का उपयोग हो |
🌞 भगवान सूर्य को भी तिलमिश्रित जल से अर्घ्य दें | इस दिन तिल का दान पापनाश करता है, तिल का भोजन आरोग्य देता है, तिल का हवन पुण्य देता है | पानी में भी थोड़े तिल डाल के पियें तो स्वास्थ्यलाभ होता है | तिल का उबटन भी आरोग्यप्रद होता है | तिल और गुड के व्यंजन, चावल और चने की दाल की खिचड़ी आदि ऋतू-परिवर्तनजन्य रोगों से रक्षा करती है | तिलमिश्रित जल से स्नान आदि से भी ऋतू-परिवर्तन के प्रभाव से जो भी रोग-शोक होते है उनका नाश करता है |

 

🌞 सूर्यदेव की विशेष प्रसन्नता हेतु मंत्र
ब्रम्हज्ञान सबसे पहले भगवान सूर्य को मिला था | उनके बाद रजा मनु को, यमराज को.... ऐसी परम्परा चली | भास्कर आत्मज्ञानी हैं, पक्के ब्रम्ह्वेत्ता हैं | बड़े निष्कलंक व निष्काम हैं | कर्तव्यनिष्ठ होने में और निष्कामता में भगवान सूर्य की बराबरी कौन कर सकता है ! कुछ भी लेना नहीं, न किसीसे राग है न द्वेष हैं | अपनी सत्ता-समानता में प्रकाश बरसाते रहते हैं, देते रहते हैं |
‘पद्म पुराण’ में सूर्यदेवता का मूल मंत्र है : ॐ ह्रां ह्रीं स: सूर्याय नम: |  अगर इस सूर्य मंत्र का ‘आत्मप्रीति व आत्मानंद की प्राप्ति हो’ – इस हेतु से भगवान भास्कर का प्रीतिपूर्वक चिंतन करते हुए जप करते हैं तो खूब प्रभु-प्यार बढेगा, आनंद बढेगा |

 

🌞 ओज-तेज-बल का स्त्रोत : सूर्यनमस्कार
सूर्यनमस्कार करने से ओज-तेज और बुद्धि की बढ़ोतरी होती है | ॐ सूर्याय नम: | ॐ भानवे नम: | ॐ खगाय नम: ॐ रवये नम: ॐ अर्काय नम: |..... आदि मंत्रो से सूर्यनमस्कार करने से आदमी ओजस्वी-तेजस्वी व बलवान बनता है | इसमें प्राणायम भी हो जाता है, कसरत भी हो जाती है |
सूर्य की उपासना करने से, अर्घ्य देने से, सूर्यस्नान व सूर्य-ध्यान आदि करने से कामनापूर्ति होती है | सूर्य का ध्यान भ्रूमध्य में करने से बुद्धि बढती है और नाभि-केंद्र में करने से मन्दाग्नि दूर होती है, आरोग्य का विकास होता है |

 

🌞 आरोग्य व पुष्टि वर्धक : सूर्यस्नान

सूर्य की धुप में जो खाद्य पदार्थ, जैसे-घी, तेल आदि 2 – 4 घंटे रखा रहे तो अधिक सुपाच्य हो जाता है | धुप में रखे हुए पानी से कभी –कभी स्नान कर सकते है | इससे सुखा रोग (Rickets) नहीं होता और रोगनाशिनी शक्ति बरक़रार रहती है |

🌞 सूर्य की किरणों से रोग दूर करने की प्रशंसा ‘अथर्ववेद’ में भी आती है | कांड – १, सूक्त २२ के श्लोकों में सूर्य की किरणों का वर्णन आता है | मैं 15-20 मिनट सूर्यस्नान करता हूँ | लेटे–लेटे सूर्यस्नान करना और भी हितकारी होता है लेकिन सूर्य की कोमल धुप हो, सूर्योदय से एक-डेढ़ घंटे के अंदर-अंदर सूर्यस्नान कर लें | इससे मांसपेशियाँ तंदुरस्त होती हैं, स्नायुओं का दौर्बल्य दूर होता हिया| सूर्यस्नान का यह प्रसाद मुझे अनुभव होता है | मुझे स्नायुओं में दौर्बल्य नहीं है | स्नायु की दुर्बलता, शरीर में दुर्बलता, थकान व कमजोरी हो तो प्रतिदिन सूर्यस्नान करना चाहिए | 

🌞 सूर्यस्नान से त्वचा के रोग भी दूर होते हैं, हड्डियाँ मजबूत होती हैं | रक्त में कौल्शियम, फ़ॉस्फोरस व लोहें की मात्राएँ बढती हैं, ग्रंथियों के स्त्रोतों में संतुलन होता है | सूर्यकिरणों से खून का दौरा तेज, नियमित व नियंत्रित चलता है | लाल रक्त कोशिकाएँ जाग्रत होती हैं, रक्त की वृद्धि होती है | गठिया, लकवा और आर्थराइटिस के रोग में भी लाभ होता है | रोगाणुओं का नाश होता है, मस्तिष्क के रोग, आलस्य, प्रमाद, अवसाद, ईर्ष्या-द्वेष आदि शांत होते हैं | मन स्थिर होने में भी सूर्य की किरणों का योगदान है | नियमित सूर्यस्नान से मन पर नियंत्रण, हार्मोन्स पर नियंत्रण और त्वचा व स्नायुओं में क्षमता, सहनशीलता की वृद्धि होती है |

🌞 नियमित सूर्यस्नान से दाँतों के रोग दूर होने लगते हैं | विटामिन ‘डी’ की कमी से होनेवाले सुखा रोग, संक्रामक रोग आदि भी सूर्यकिरणों से भगाये जा सकते हैं |

🌞 अत: आप भी खाद्य अन्नों को व स्नान के पानी को धुप में रखों तथा सूर्यस्नान का खूब लाभ लो |

 

दृढ़ संकल्पवान व साधना में उन्नत होने का दिन
🌞 उत्तरायण यह देवताओं का ब्राम्हमुहूर्त है तथा लौकिक व अध्यात्म विद्याओं की सिद्धि का काल है | तो मकर संक्रांति के पूर्व की रात्रि में सोते समय भावना करना कि ‘पंचभौतिक शरीर पंचभूतों में, मन, बुद्धि व अहंकार प्रकृति में लीन करके मैं परमात्मा में शांत हो रहा हूँ | और जैसे उत्तरायण के पर्व के दिन भगवान सूर्य दक्षिण से मुख मोडकर उत्तर की तरफ जायेंगे, ऐसे ही हम नीचे के केन्दों से मुख मोडकर ध्यान-भजन और समता के सूर्य की तरफ बढ़ेंगे | ॐ शांति .... ॐ आनंद .... ‘

🌞 रात को ‘ॐ सूर्याय नम: |’ इस मंत्र का चिंतन करके सोओगे तो सुबह उठते-उठते सूर्यनारायण का भ्रूमध्य में ध्यान भी सहज में कर पाओगे | उससे बुद्धि का विकास होगा |

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गणतंत्र दिवस
26-01-2019

26 जनवरी 

26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस, इसलिए है इस दिन का महत्व

भारत में प्रत्येक साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। इसी दिन भारत में कानून का राज कायम हुआ।

इस दिन राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और 21 तोपों की सलामी दी जाती है। सामूहिक रूप में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया जाता है।

भारत में 26 जनवरी खास महत्व रखता है। इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था यानि देश में कानून के राज की शुरुआत हुई। 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व का दर्जा प्राप्त है। हर साल इस दिन को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत अपने गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाता है। इंडिया गेट पर राज्यों की झांकियां निकाली जाती हैं और राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है। आइए जानते हैं कि भारतवासियों के लिए क्यों खास है यह दिन- 

इसलिए है खास 26 जनवरी 
वर्ष 1929 के दिसंबर महीने में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। इसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे। इस अधिवेशन में प्रस्ताव पास हुआ कि अगर अंग्रेजी  हुकूमत 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमिनियन का पद नहीं देता है तो भारत खुद को पूरी तरह से स्वतंत्र घोषित कर देगा। इसके बावजूद 26 जनवरी 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं दिया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन शुरू किया। इस दिन जवाहर लाल नेहरु ने लाहौर में रवि नदी के किनारे तिरंगा फहराया। इसके बाद भारत ने 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया। उस दिन से 1947 में देश के आजाद होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। इसके बाद देश आजाद हुआ और 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 तक तैयार हो गया था। तब जो नेता थे उन्होंने दो महीने और रुकने का निर्णय लिया। और फिर 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और इस दिन को तब से गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है।
 
26 नवंबर संविधान दिवस
भारत के आजाद होने के बाद संविधान सभा का गठन हुआ। संविधान सभा ने अपना काम 9 दिसंबर 1946 से शुरू किया। दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान 2 साल, 11 माह, 18 दिन में तैयार हुआ। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान सौंपा गया, इसलिए 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की आजादी थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किए। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई। 

डॉ. भीमराव अंबेडकर थे प्रारूप समिति के अध्यक्ष 
संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ. भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितियां थीं जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) सबसे प्रमुख और महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण संविधान लिखना या निर्माण करना था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। अंबेडकर को संविधान का पिता भी कहते हैं।

संसद भवन के पुस्तकालय में है संविधान की हाथ से लिखी मूल प्रतियां 
भारतीय संविधान की दो प्रतियां जो हिंदी और अंग्रेजी में हाथ से लिखी गई। भारतीय संविधान की हाथ से लिखी मूल प्रतियां संसद भवन के पुस्तकालय में सुरक्षित रखी हुई हैं। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने गवर्नमैंट हाऊस में 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी। गणतंत्र दिवस की पहली परेड 1955 को दिल्ली के राजपथ पर हुई थी। 29 जनवरी को विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन किया जाता है जिसमें भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के बैंड हिस्सा लेते हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री अमर ज्योति पर शहीदों को श्रद्धाजंलि देते हैं जिन्होंने देश के आजादी में बलिदान दिया।

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अरथूना-माही महोत्सव 7 से 9 जनवरी
07-01-2019 to 09-02-2019

कला-संस्कृति और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत के साथ नैसर्गिक सौंदर्यश्री को अपने आंचल में समाहित करने वाले बांसवाड़ा जिले को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए आगामी 7 से 9 जनवरी, 2019 को अरथूना-माही महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। 

जनजाति क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और वन विभाग के साथ-साथ गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव के ख्यातनाम शास्त्रीय और लोककलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से स्तरीय रंगारंग सांस्कृतिक आयोजन होंगे। 

राज्यमंत्री बामनिया 7 जनवरी को करेंगे रंगारंग शुरूआत: 
जिला कलक्टर गुप्ता ने बताया कि जिले की नैसर्गिंक संपदा, कला, संस्कृति के सौंदर्य को देश-दुनिया तक पहुंचाने की दृष्टि से पहली बार डिजीटल फोटो व विडियो प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी सूचना केन्द्र में 7 जनवरी को शुरू होगी। प्रदेश के जनजाति क्षेत्रीय विकास, उद्योग एवं राजकीय उपक्रम विभाग के राज्यमंत्री अर्जुनसिंह बामनिया के मुख्य आतिथ्य में इस प्रदर्शनी के शुभारंभ के साथ महोत्सव की शुरूआत होगी। प्रदर्शनी सुबह 11 बजे प्रारंभ होगी और इसमें जिले की नैसर्गिंक संपदा, प्राचीन शिल्पसौंदर्य और पर्यटन स्थलों के फोटो-विडियो को एलईडी टीवी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रदर्शनी तीन दिनों तक जनसामान्य के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। 

कोणार्क फेस्टिवल की तर्ज पर होगा ‘अरथूना महोत्सव’: 
कलक्टर गुप्ता ने बताया कि महोत्सव के तहत 7 जनवरी की शाम दसवीं शताब्दी के पुरातात्विक महत्ता वाले जिले के सबसे महत्त्वपूर्ण और प्राचीन स्थल अरथूना में शास्त्रीय गीत-संगीत व नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जाएगी। महोत्सव के दौरान अरथुना में रात्रि में कोणार्क फेस्टिवल की तर्ज पर प्राचीन मंदिरों पर विशेष रंगीन रोशनी की जाएगी तथा मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा। इन मंदिरों के आगे आकर्षक शास्त्रीय संगीत व नृत्यों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी, देश के ख्यातनाम शास्त्रीय कलाकार इसमें प्रस्तुती देंगे |

जीजीटीयू करवाएगा बांसवाड़ा बर्डफेस्टिवल:   
8 जनवरी को कूपड़ा तालाब पर आयोजित होने वाले एक दिवसीय बांसवाड़ा बर्डफेस्टिवल के आयोजन की जिम्मेदारी गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय को दी गई है। बर्ड फेस्टिवल के आयोजन में देश-प्रदेश के बर्डवॉचर्स, बर्ड एक्सपर्ट्स के साथ शहर के समस्त निजी व सरकारी स्कूलों के लगभग 1 हजार विद्यार्थियों को बर्डवॉचिंग कराई जाएगी। इस मौके पर पूर्व की भांति क्विज एवं पेंटिंग प्रतियोगिता, फेस (टेटू) पेंटिंग, बर्ड्स की फोटो एवं स्टाम्प प्रदर्शनी के साथ तितलियों के जीवनचक्र की लाईव प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।  

कागदी पिक-अप-वियर का होगा प्रमोशन: 
 शहरवासियों को स्थानीय नैसर्गिक संपदा और संस्कृति से जोड़ने की दृष्टि से कागदी पिक-अप-वियर का प्रमोशन किया जा रहा है। इस बार फेस्टिवल के तहत 8 जनवरी की रात्रि इस आकर्षक उद्यान पर आकर्षक रोशनी की जाएगी तथा यहां पर मुक्ताकाशी रंगमंच स्थापित करते हुए लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। 

ये आयोजन भी होंगे: 
 6 जनवरी को शहर में एक बाईक रैली का आयोजन किया जाएगा वहीं 9 जनवरी को गेमन पुल पर नौकायन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा इसमें नौकाओं को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा और सर्वश्रेष्ठ नोकाचालक तथा रंगारंग नौका को पुरस्कृत भी किया जाएगा।  

भव्य सांस्कृतिक निशा से होगा समापन: 
कलक्टर ने बताया कि अरथूना-माही महोत्सव का समापन कुशलबाग मैदान में 9 जनवरी की रात्रि को भव्य सांस्कृतिक निशा के माध्यम से होगा। इसमें देश-प्रदेश के ख्यातनाम लोक कलाकारों के साथ वागड़ में होली के प्रतिनिधि गैर नृत्य की प्रस्तुतियां लोगों का मन मोह लेंगी। इस आयोजन में रंगीन रोशनी विशेष आकर्षण का केन्द्र रहेगी। 

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अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स स्पर्धाएं
11-01-2019 to 13-01-2019

दाउदी बोहरा समुदाय की ओर से पहली बार अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स स्पर्धाएं बांसवाड़ा में कराई जा रही है।

11 जनवरी से शुरू होने वाली इस स्पर्धा में मदरसा सैफियाह बुरहानिया (एमएसबी) के खिलाड़ी भाग लेंगे। तीन दिनों तक चलने वाली इस स्पर्धा में विदेशों से भी खिलाड़ी शामिल होंगे। एमएसबी की दुनियाभर में 24 स्कूलें हैं, जिसमें खाड़ी देश और अफ्रीका, भारत, पाकिस्तान जैसे देश हैं। इस स्पर्धा में टी-10 क्रिकेट, वॉलीबाल और छात्रा वर्ग में थ्रो बॉल स्पर्धा होगी।

बताया जा रहा है कि इसमें 12 सौ से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे।

13 जनवरी को शहर में मैराथन होगी। मैराथन सुबह आठ बजे नई आबादी गोल चौराहा से आरंभ होगी जो प्रमुख मार्गों से होकर डूंगरपुर मार्ग स्थित एमएसबी ग्राउंड पहुंचेगी। समुदाय के बच्चे, युवा और पुरुष भाग लेंगे। 

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कांठल महोत्सव
25-01-2019 to 26-01-2019

प्रतापगढ़ जिला स्थापना दिवस पर दो दिवसीय कांठल महोत्सव का आगाज शुक्रवार से

महोत्सव में भाग लेने दर्शको को मिलेंगे लैपटाॅपएलईडी टीवी एवं मोबाईल

प्रतापगढ़, 24 जनवरी। प्रतापगढ़ जिले के स्थापना दिवस पर दो दिवसीय कांठल महोत्सव की शुरूआत शुक्रवार को प्रातः 8.30 बजे नगर परिषद से साईकिल रैली, बैण्ड एवं गैर नृत्य से होगा। पैरासेलिंग महोत्सव का रोमाचंक कार्यक्रम होगा वही सांस्कृतिक संध्या में इण्डिया गोट टेलेन्ट फेम कमलेश पटेल अपना टेलेन्ट की प्रस्तुति करेंगे।

 

जिला कलक्टर श्यामसिंह राजपुरोहित ने बताया कि जिला प्रशासन, नगर परिषद एवं जनजाति क्षेत्राीय विकास विभाग द्वारा आयोजित किये जा रहे महोत्सव को लेकर शहर को सजाया जा रहा है। नगर परिषद द्वारा साफ-सफाई के साथ-साथ प्रमुख चैराहो एवं भवनो को आकर्षक रोशनी की जा रही है। महोत्सव के प्रथम दिन 25 जनवरी, शुक्रवार को रैली का प्रातः 8.30 बजे आयोजन होगा जो नगर परिषद से प्रारंभ होकर सूरजपोल दरवाजा, सदर बाजार होते हुए अटल रंगमंच पर समापन होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 9.30 बजे अटल रंगमंच मैदान में पैरासेलिंग के कार्यक्रम होंगे।

 

कार्यक्रम के अनुसार जिले की कला एवं संस्कृति सहित पर्यटन स्थलो आदि पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन नगर परिषद में प्रातः 11 बजे  एवं 11.30 चित्राकला प्रतियोगिता का आयोजन होगा। मध्यान्ह 2.30 बजे श्री भट्टारक दिगम्बर जैन बोर्डिंग, एमजी रोड़ में रंगोली प्रतियोगिता एवं सांय 6.30 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा जिसमें इंडिया गोट टेलेण्ट फेम श्री कमलेश पटेल की कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। सांस्कृतिक संध्या में अलबेली लोक कला मण्डल, निवाई के कलाकारांे द्वारा राजस्थानी नृत्यों की प्रस्तुति होगी।

 

कांठल महोत्सव के दूसरे दिन 26 जनवरी को सुखाड़िया स्टेडियम में मध्यान्ह एक बजे महिला एवं पुरूष वर्ग में रस्साकशी प्रतियोगिता, नीबूदौड़, सूई धागा, म्यूजिकल चेयर रेस, तीन टांग दौड़, साफा बांधो एवं अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित होगी। सांय 6.30 बजे श्री भट्टारक दिगम्बर जैन बोर्डिंग में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं समापन समारोह आयोजित होगा। सांस्कृतिक संध्या में तराना, सरगम विजन, रिदम एवं स्वरांकुर व विद्यालय द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी।

 

कांठल कला एवं संस्कृति के दो दिवसीय उत्सव में भाग लेने वाले दर्शको को लक्की ड्रा से लैपटाॅप, एलईडी टीवी एवं एनराॅयड मोबाईल दिया जायेगा।

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    बांसवाडा में मार्केटिंग नौकरी प्राप्त करने के लिए संपर्क करे 9413214785


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