विश्व महिला दिवस

08-03-2019

Updated on March 8, 2019

अपनी जिन्दगी के सारे रिश्तो के रूपों को अपने प्यार से निभाने वाली नारी शक्ति को इस महिला दिवस पर प्रणाम. जिन्दगी की इस भाग-दोड़ भरे समय में नारी माँ, बहन, बेटी, मोसी, भुआ, चाची की जिम्मेदारी का निर्वहन करने वाली इस ममता के प्रतीक स्त्रियों की जिन्दगी में कई उतार-चढ़ाव आते है. देश प्रेम की बात करे तो अपने शिशु(दूध-पीते पुत्र) को लेकर अपनी पीठ पीछे बांध युद्ध से भूमि में अंग्रेजो के विरुद्ध युद्ध लड़ने वाली वीरांगना झाँसी की रानी की वीरता जो आज हर नारी की प्रेरणा का प्रतीक(MENTER) है. जब देश विषम परिस्थितियों से गुजर रहा था तब हमारे देश की पहली नारी प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जिन्हें प्रियदर्शनी भी कहा जाता था। इन्होंने अपने कोशल से देश हीत में कई काम किये जीन की वजह आज हमारी नारी को हमारा समाज मजाक में या व्यंग्य में कहता हे की यह इंदिरा गाँधी है। मैरी कॉम जिन्होंने अपने दृड संकल्प से देश का तिरंगा लहराया और महिलाओं को सन्देश दिया, कल्पना चावला ने आसमान की ऊँचाइयों को छुवा और दुनिया को बताया की महिला अगर चाहे तो चाँद पर भी पहुँच सकती है, ऐसे कई उदाहरण मोजूद है। पूर्व राष्ट्रपती प्रतिभा पाटिल जो की देश जी प्रथम महिला राष्ट्रपति बनी जीनके कार्यकाल को आज हम सभी जानते है। अगर बात करे हम हमारे शहर की तो हमारे शहर की तो कई एसी महिलाये हे जीनके साहस से उन्होंने समाज को योगदान देने के साथ अपनी घर की जिम्मेदारीया भी निभाई है जिनको आज के दिन याद कर हम आने वाली पीढ़ी को उदाहरण स्वरूप उपहार दे सके। शहर में सर्वप्रथम नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णा कटारा के समय हुवे शहर में किये गये कामो का योगदान सब जानते है,  व वर्तमान नगर परिषद सभापति मंजुबाला पुरोहित के जीवन की हो उनकी इस यात्रा में कई बड़ी चुनितियो का डट कर सामना किया चाहे वो चुनोती घर से शुरू होकर राजनेतिक मंच की हो उन्होंने अपने सरल स्वभाव से अपनी नारी शक्ति का परिचय दिया है। हमारी कई समाज सेवी संस्थाए हे वीरा संस्था, दुर्गा वाहिनी इन्होने समय की मांग पर हर समय आगे आने वाली हमारे हर वर्गीय महिलाओ ने अपने योगदान से अपनी नारी शक्ति का उदाहरण पेश किया है। जिनमे वर्तमान हमारे जिला परिषद की जिला प्रमुख रेशम मालविया ने अपने जीवन के अनुभव से दो बार जिला प्रमुख बनी इन्होने यह साबित किया के अगर देश को हम अपना घर समझे तो हमारे काम करने के तरीको में एक अपनापन लगता है, जिससे देश को अपनी प्रतिभा से अपना योगदान दे सकते है। पिछले कुछ समय को हम याद करे तो नगर परिषद के चुनाव में पहली बार हमारी नारी शक्ति ने आगे बढ़ कर अपनी क्षमता का परिचय दिया जिससे इस शहर को आगे बढाया। वार्ड न. 36 की सीता डामोर जिन्होंने कई उतार-चड़ाव के बाद अपनी जित को अपनी पहचान ही बना दिया हो।

इन सभी के यहा तक के संघर्ष को हम देखे तो इनकी जिन्दगी में भी कई उतर चढ़ाव आये है फिर भी अपनी सोच को सकारात्मक रख कर अपने लक्ष्य को पूरा किया है. आप सभी इनसे परीचित जरुर है आज के दिन इनके बारे में आपको बताकर हम यह सिख सकते है की नारियो के उपर अत्याचार, दहेज, समाज की रोक टोक या कई तरह की समस्याओ के बावजूद हम अपनी सोच को बदले तो महिलाये अपने उस मुकाम को हासिल कर सकती जिनका इनको हक है।

नारी शक्ति को हमारा सादर वन्दन।

8 मार्च महिला दिवस पर आप सभी को www.HelloBanswara.com की और से शुभकामनाये व बधाई.

विश्व महिला दिवस समानाधिकार के लिए आम महिलाओं द्वारा शुरू की गई यह लड़ाई ।

प्राचीन ग्रीस में लीसिसट्राटा नाम की महिला ने फ्रेंच क्रांति के समय युद्घ समाप्त करने की माँग रखते हुए इस आन्दोलन की शुरूआत की थी, फारसी महिलाओं ने एकत्रित होकर वरसेल्स में इस दिन एक मोर्चा निकाला, इस मोर्चे का उद्देश्य युद्घ की वजह से महिलाओं पर बढ़ते हुए अत्याचार को रोकना था। इस प्रकार से ये क्रांति आगे बढती गई.

सन 1909 में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका द्वारा पहली बार पूरे अमेरिका में 28 फरवरी को महिला दिवस मनाया गया।  सन 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल द्वारा कोपनहेगन में महिला दिवस की स्थापना हुई।  और  अब महिला दिवस अब लगभग सभी विकसित, विकासशील देशों में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं को उनकी क्षमता, सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक तरक्की दिलाने व उन महिलाओं को याद करने का दिन है जिन्होंने महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए अथक प्रयास किए। 

भारत में एक महिला को शिक्षा का, वोट देने का अधिकार और मौलिक अधिकार प्राप्त है। धीरे धीरे परिस्थितियाँ बदल रही हैं। भारत में आज महिला आर्मी, एयर फोर्स, पुलिस, आईटी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे क्षेत्र में पुरूषों के कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं। माता-पिता अब बेटे-बेटियों में कोई फर्क नहीं समझते हैं। लेकिन यह सोच समाज के कुछ ही वर्ग तक सीमित है। और कुछ वर्ग आज भी महिलाओं पर अत्याचार कर रहा है, उन्हें किसी विशेष कोने में ही रखा जा रहा है. इन सभी चीजों से आगे निकल कर नयी सोच के साथ आगे चलना चाहिए. और हर किसी को आज़ादी के साथ जीने का अधिकार मिले.

सही मायने में महिला दिवस तब ही सार्थक होगा जब विश्व भर में महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से संपूर्ण आजादी मिलेगी, जहाँ उन्हें कोई प्रताड़ित नहीं करेगा, जहाँ उन्हें दहेज के लालच में जिन्दा नहीं जलाया जाएगा, जहाँ कन्या भ्रूण हत्या नहीं की जाएगी, जहाँ बलात्कार नहीं किया जाएगा, जहाँ उसे बेचा नहीं जाएगा। समाज के हर महत्वपूर्ण फैसलों में उनके नज़रिए को महत्वपूर्ण समझा जाएगा। तात्पर्य यह है कि उन्हें भी पुरूष के समान एक इंसान समझा जाएगा। जहाँ वह सिर उठा कर अपने महिला होने पर गर्व करे, न कि पश्चाताप कि काश मैं एक लड़का होती।

 

 

Recent News

www.hellobanswara.com/bitz-computers