देश की सुरक्षा के लिए बने मीडिया कानून

Updated on December 21, 2017 Education Govt Politics Politics Education
देश की सुरक्षा के लिए बने मीडिया कानून, Banswara "Media law made for the protection of the country"

Banswara December 21, 2017 सभी के हित की व्यवस्था और देश की सुरक्षा के लिए प्रेस की आजादी और नागरिक को सूचना देने का अधिकार भी सीमित होता है। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से मीडिया कानून के बारे में चर्चा करेंगे।

 

भारतीय दंड संहिता 1860
निम्न मामले अपराध की श्रेणी में आते हैं 
1 . दो वर्गों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना।
2. वह अफवाहों के जरिए सेना को विद्रोह अथवा कर्तव्यपालन से विमुख होने के लिए बढ़ाना।
3. सरकार के खिलाफ फतवा शांति भंग के लिए लोगों को भड़काना।
4. एक समुदाय के खिलाफ दूसरे को भड़काना।
5. शब्दों या दृश्यों के जरिए एक समुदाय व्यक्ति किसी वर्ग के नागरिक की धार्मिक भावनाओं को आहत करना।

इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885
यह एक्ट लोगों की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, देश की अखंडता और संप्रभुता के साथ सुरक्षा के लिए संदेशों को रोकने का अधिकार देता है। भारत में प्रकाशित होने वाले केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों के संदेश आपातकाल के अलावा रोके नहीं जा सकते हैं। केंद्र सरकार या राज्य सरकार को आपातकाल या लोक-सुरक्षा के हित में फोन संदेश को प्रतिबंधित करने एवं उसे टेप करने तथा उसकी निगरानी का अधिकार हासिल है।

इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट 1898
यह एक्ट राज्य या इसके प्रतिनिधि को अश्लील प्रकाशनों को रोकने और आगे ना भेजने का अधिकार देता है।

पुलिस वैमनस्य कानून 1922
इस एक्ट के तहत पुलिस में वैमनस्य भड़काने के लिए दंड का प्रावधान है।

सरकारी गोपनीयता अधिनियम 1923
गोपनीय सरकारी दस्तावेजों, फोटोग्राफ्स जैसे रिकॉर्ड के प्रकाशन को प्रतिबंधित करता है। यह कानून भारतीय पत्रकारों के लिए सरकार की अंदरूनी खबरें प्रकाशित करने में रोड़ा भी बनता है। अधिनियम रेंज के अंतर्गत तीन से चौदह साल की कैद की सजा शामिल है।

चमत्कारी दवा और औषधि अधिनियम 1956
यह लोगों के स्वास्थ्य के हित में यौन रोगों को चमत्कारी इलाज आदि के विज्ञापन को प्रतिबंधित करता है।

कस्टम एक्ट 1962
यह एक्ट भारत सरकार की सुरक्षा सार्वजनिक व्यवस्था नैतिकता के लिए विदेश से आयात निर्यात प्रतिबंधित करने का अधिकार देता है।

क्रिमिनल प्रोसीजर कोड 1973
यह ऐसा प्रकाशन जब्त करने का अधिकार देता है, जो भारतीय दंड संहिता के तहत सार्वजनिक व्यवस्था या राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा हो।

बाल नुकसानदेह प्रकाशन अधिनियम 1956
यह ऐसे प्रकाशन और वितरण को प्रतिबंधित करता है, जो बच्चों को समाज विरोधी भावनाएं पैदा करता हो।

न्यायालय की अवमानना अधिनियम 1971
यह न्यायालय के आदर्शवादी की जानबूझकर अवज्ञा न्यायिक प्रक्रिया में बदलने संबंधित है। जैसे जज के निजी चैंबर में हुई सुनवाई को प्रकाशित कर देना आदि-आदि।

कॉपीराइट एक्ट 1957
यह एक्ट 1984 में संशोधित किया गया। यह लेखकों, कलाकारों, संगीतकारों, नाटककारों, फिल्म, वीडियो निर्माताओं को अपने सजन कार्य को सुरक्षा प्रदान करता है ।

महिलाओं का प्रतीक जन्म चित्रण अधिनियम 1986
इसका उद्देश्य विज्ञापन के माध्यम, प्रकाशन, लेख, रंग चित्रण में महिलाओं को अशिष्ट रूप से प्रदर्शन करने पर रोक लगाना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 गैरकानूनी
देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित एक कानून है। यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को गिरफ्तारी का आदेश देता है।

- अमित शाह, पत्रकार



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