सफदर हाशमी की हत्या के बाद प्रचलित हुए थे नुक्कड़ नाटक

Updated on December 8, 2017 Other
सफदर हाशमी की हत्या के बाद प्रचलित हुए थे नुक्कड़ नाटक, Banswara "After the killing of Safdar Hashmi, the nook drama was prevalent"

Banswara December 08, 2017 20-25 साल पहले देखे तो देश में नाटकों का बोलबाला ज्यादा ही था। इसे एक विस्फोटक भी कह सकते हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और आंध्र ऐसे प्रदेश है, जहां पर आज भी नुक्कड़ नाटक का प्रचलन अधिक है। यहां पर नुक्कड़ नाटक के समूह अधिकांश की संख्या में सक्रिय है। एक अध्ययन के मुताबिक देशभर में सात हजार के आसपास यह समूह भारतभर में कार्यरत है। सोशल ग्रुप अपने संदेश हर डोर टू डोर पहुंचाने के लिए नुक्कड़ नाटक का प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं। इन दिनों यह भी देखने को आया है कि कई कॉलेजों के छात्र सामाजिक संदेश देने के लिए अपने खूद की ओर से तैयार किए गए नाटक प्रस्तुत कर रहे हैं। जिनका विषय दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, अंधविश्वास आदि को सुधारने संबंधित है।  नाटककार सफदर हाशमी की हत्या के बाद नुक्कड़ नाटकों का प्रचलन बढ़ गया। चर्चा में रहे । हाशमी को दिल्ली से सटे गाजियाबाद क्षेत्र में नुक्कड़नाटक करने के दौरान मार दिया था। 

1944 में इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन के संस्थापक बिजन भट्‌टाचार्य को संभवत: पहला नाटक प्रस्तुत करने का श्रेय जाता है। जिसे निबान खेला कहा जाता है। इसमें उन्होंने जमींदारों की ओर से किए जा रहे किसानों के शोषण के बारे में विस्तृत अभिव्यक्ति प्रस्तुत की।  
नुक्कड़ नाटक में सबसे बड़ा नाम बादल सरकार का है। सरकार ने देह भाषा और जनता पर केंद्रित संवादों के क्षेत्र में प्रभावी काम किया। नुक्कड़ नाटकों की एक विशेषता यह भी है कि इसमें लोकनृत्य, स्थानीय स्तर के संगीत और विधाएं भी स्वत: समाहित हो जाती है। उदाहरण के लिए बड़ौदा गुजरात का नाट्य समूह ही ले लेवे । इसमें गरबों का उपयोग होता है। मूल रूप से नुक्कड़ नाटकों का प्रयोग महिला शोषण, गरीबी, भेदभाव, अशिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है। 

कौन है सफदर हाशमी 

एक प्रख्यात जनवादी, नाटककार, कलाकार, निर्देशक, गीतकार और कलाविद् थे। उनका जन्मदिन (12 अप्रैल 1954) नुक्कड़ नाटक दिवस के रूप में मनाया जाता है। सफदर हाशमी ‘जन नाट्य मंच’ और दिल्ली में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया  के संस्थापक सदस्य थे। जन नाट्य मंच (जनम) के संस्थापक सदस्य थे। यह संगठन 1973 में इप्टा से अलग होकर बना, सीटू जैसे मजदूर संगठनों के साथ जनम का अभिन्न जुड़ाव रहा। इन्होंने बहुत से गीतों, एक टेलीविजन धारावाहिक, कविताओं, बच्चों के नाटक, और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की विरासत सौंपी।
1975 में आपातकाल के लागू होने तक सफदर हाशमी ‘जनम’ के साथ नुक्कड़ नाटक करते रहे। अंग्रेजी साहित्य के व्याख्याता भी रहे। आपातकाल के बाद सफदर वापिस राजनैतिक तौर पर सक्रिय हो गए और 1978 तक जनम भारत में नुक्कड़ नाटक के एक महत्वपूर्ण संगठन के रूप में उभरकर आया।
1 जनवरी 1989 को जब दिल्ली से सटे साहिबाबाद के झंडापुर गांव में ग़ाज़ियाबाद नगरपालिका चुनाव के दौरान नुक्कड़ नाटक ‘हल्ला बोल’ का प्रदर्शन किया जा रहा था, तभी जनम के ग्रुप पर  कुछ लोगों ने हमला कर दिया। इस हमले में सफदर बुरी तरह से जख्मी हुए। उसी रात को सफदर की मृत्यु हो गई। इस घटना के 14 साल बाद गाजियाबाद की एक अदालत ने 10 लोगों को हत्या के मामले में आरोपी करार दिया।

- अमित शाह



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